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विविध - Page 11

महिला सशक्तिकरण: मिथ्या या सत्य?

“हटा दो सब बाधाएँ मेरे पथ की,  मिटा दो आशंकाएँ सब मन की, ज़माने को बदलने की शक्ति को समझो,  कदम से कदम मिला कर चलने तो दो मुझको” “महिलाएं आगे बढ़ रही हैं…” “देश बढ़ रहा है…” “सिनारिओ बादल रहा है…” “महिला सशक्तिकरण हो रहा है…” – ये कुछ पंक्तियाँ हैं जो आजकल हम सब की ज़ुबान पर यदा कदा बसी हुई हैं। पर क्या असली मायने में महिलाओं का सशक्तिकरण हो रहा है??? सन 1931 में हुये दूसरे गोल मेज़ सम्मेलन में महात्मा गांधी ने

देशप्रेम के दो शब्द

विकास का हमारा सफर भी जारी रहेगा , मगर आज तो वो शब्द ढूंढना है जो मेरे देशप्रेम और देश

मदर्स डे

पिछले वर्ष ने माँ को एक एहसास में तब्दील कर दिया…और उस एहसास की रौ में बह यादों में सहेजे

स्त्री-विमर्श

स्त्रियों का क्रोध प्रतिशोध चाहता है और वह इसके लिए कोई भी कीमत अदा करने को तैयार हो उठती। प्रतिशोध वे लें किसी से भी, अंततः प्रभावित पुरुष ही होते हैं। PRAVASISAMWAD.COM आज मेरा मन स्त्री-विमर्श का हो गया है। वैसे भी स्त्री-विमर्श पुरुषों के लिए सबसे रुचिकर विषय होता

अनुवाद का सतही संवाद

आज एक मित्र (यही शब्द ठीक रहेगा) ने शुभ रात्रि कहने के पश्चात मेरे लिए मधु-स्वप्न की भी कामना की।

‘धूमिल’ पुण्यतिथि विशेष: उन्हें शोषक पर क्षोभ तो था, पर शोषितों द्वारा शोषकों का ही पक्ष लेना भी पीड़ित करता था

हिंदी कविता के एंग्री यंग मैन सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की 47वीं पुण्यतिथि (10 फरवरी) पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। गुस्सा
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