pravasisamwad -

Migrants/Expatriates

VIEW ALL »

विविध

VIEW ALL »

समुद्र किनारे बसी कला की बस्ती: चोलामंडल कलाकार ग्राम

कल्पना कीजिए—चेन्नई के शोर-शराबे से दूर, समुद्र की हवा में घुली रचनात्मकता, जहाँ कैनवास, हथकरघा और मूर्तियाँ साथ-साथ साँस लेती हैं। एक ऐसा गाँव,
January 13, 2026

खरीदारी की लत एक समस्या

एक वक़्त था जब लोग बिना ज़रूरत बाज़ार नहीं जाते थे। मुझे याद है मेरी दादी माँ महीने में केवल एक बार सौदा लेनेबाज़ार
January 2, 2026

‘क्या ज़रूरी था, दाढ़ तोड़ के जाना तेरा, माना, तू नरमदिल न हुआ, ठेकुआ मेरा.’

आनंदवर्धन ओझा बिहारी भारत के किसी कोने में रहे,वह अपनी प्रवृत्ति से विवश रहता है. गर्मियों में उसे चाहिए आम-लीची-बेल, हर मौसम में सत्तू,
December 30, 2025

Opinion

VIEW ALL »

Interviews

VIEW ALL »

Latest

VIEW ALL »
Go toTop