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दास्तान-ए-इश्क़ भाग # 3

अब स्नातक पूरा होने को था, नौकरी मिलने की कोई संभावना नहीं थी और अपने विषय से मेरा कोई सरोकार नहीं था ऐसे में मैंने अपना भविष्य सुरक्षित रखने के लिए (नाकारा घोषित होने को तत्काल स्थगित रखने के लिए) प्रयोजनमूलक हिन्दी (पत्रकारिता) में दाखिला लिया PRAVASISAMWAD.COM स्नातक में मेरा विषय सांख्यिकी प्रतिष्ठा थी, जिसने एक छात्र के रूप में मेरी प्रतिष्ठा काफी कम की

दास्तान-ए-इश्क भाग # 3

जब मैं काशी पहुँचा तब मुझे ज्ञात हुआ कि क्यों एक ब्रह्मचर्य व्रत धारी धनुर्धर काशी नरेश की कन्याओं को हर ले गया था PRAVASISAMWAD.COM सन 2000 में 12वीं की परीक्षा देने के साथ ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दाखिले की परीक्षा दी।
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