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विविध - Page 10

अनुवाद का सतही संवाद

आज एक मित्र (यही शब्द ठीक रहेगा) ने शुभ रात्रि कहने के पश्चात मेरे लिए मधु-स्वप्न की भी कामना की।

‘धूमिल’ पुण्यतिथि विशेष: उन्हें शोषक पर क्षोभ तो था, पर शोषितों द्वारा शोषकों का ही पक्ष लेना भी पीड़ित करता था

हिंदी कविता के एंग्री यंग मैन सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की 47वीं पुण्यतिथि (10 फरवरी) पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। गुस्सा

फगुनाहट

अब न मदनोत्सव मनाया जाता है, न होली में वो हुड़दंग बचा है, न फगुनाहट में वो रस। जिंदा रहने

बनारस की बसंत पंचमी

बनारस एक ऐसा शहर है जहाँ इतिहास अपने सम्पूर्ण वैभव के साथ वर्तमान से मिलता है और वर्तमान भी उदार

हरिवंश राय ‘बच्चन’ जयंती विशेष

मधुशाला मेरी समझ में अपने आप में सम्पूर्ण, एक व्यापक जीवन दर्शन है  और कई बार हाला अपने शाब्दिक अर्थ की परिसीमा को  लाँघकर लाक्षणिक अर्थ ग्रहण कर लेती है।  कई बार वह विशुद्ध हाला ही रहती है, लोग चाहे उसकी

देव दीपावली की वो शाम …

..उन बंगाली मित्र के प्रति मेरे मन में प्रेम और श्रद्धा ऐसा नहीं है कि अब आई हो। देव दीपावली की शाम से पूर्व ही उन्होंने हमसे कहा कि उनकी सखी और उसकी कुछ सहेलियां भी देव दीपावली देखने की आकांक्षी हैं और भीड़ के भय से वे हमारे साथ आना चाहती हैं।बस वो दिन है और आज का दिन है, उसके प्रति मेरे मन में  प्रेम बना हुआ है। PRAVASISAMWAD.COM जब कभी भी मैं गुलाम अली साहब का गाना “चुपके-चुपके रात दिन… ” सुनता हूँ तो मुझे अपने
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