‘आम’ नहीं है आम, खास है सबके लिए आम शब्द की उत्पत्ति अम्र से हुई है जिसका अर्थ होता है खट्टा, शायद यही अम्र शब्द यात्रा करता हुआ
अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (21 फरवरी): बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल वह माँ की ही बोली होती है जिससे शब्द से हमारा परिचय होता है। ध्वनि और अर्थ को परस्पर जोड़
अनुवाद का सतही संवाद आज एक मित्र (यही शब्द ठीक रहेगा) ने शुभ रात्रि कहने के पश्चात मेरे लिए मधु-स्वप्न की भी कामना की।
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले… आदमी की परिस्थितियों के आगे की विवशता को इससे बेहतर शब्दों का जामा पहनाना किसी मनुष्य के बस का तो
‘धूमिल’ पुण्यतिथि विशेष: उन्हें शोषक पर क्षोभ तो था, पर शोषितों द्वारा शोषकों का ही पक्ष लेना भी पीड़ित करता था हिंदी कविता के एंग्री यंग मैन सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की 47वीं पुण्यतिथि (10 फरवरी) पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। गुस्सा
लता जी की आवाज़ , पूरे देश की पहचान है … कल ही बहार की आमद पर फूल देखे , आसमान का रंग देख , खुद से कहा था – सखी
जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे … हाँ दीदी आपको हम कभी भूल नहीं पाएँगे और आपके जाने के दर्द का सांत्वना भी हमको आपके गीतों से
लता जी की आवाज़, पूरे देश की पहचान है … लोरी से ले कर भजन , ग़ज़ल से लेकर अनगिनत चुलबुले गीतों में आपने अपनी आत्मा डाली है बरसों ..
बनारस की बसंत पंचमी बनारस एक ऐसा शहर है जहाँ इतिहास अपने सम्पूर्ण वैभव के साथ वर्तमान से मिलता है और वर्तमान भी उदार