India Archives | Page 596 of 913 | Pravasi Samwad
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India - Page 596

चरैवेति चरैवेति…

मेरे घुमक्कड़पन से चिढ़ते हैं मेरे परिवार के सदस्य! वर्जनाएँ ढेरों मिलती हैं … पर दुनिया को देख लेने की मेरी इस चाह को कोई वाजिब नहीं समझता। वे इस बात से अनभिज्ञ हैं कि चरंति वसुधां कृत्स्नां वावदूका बहुश्रुताः यानी बुद्धिमानऔर वाक्–कुशल व्यक्ति, सारी पृथ्वी का भ्रमण करते हैं !  PRAVASISAMWAD.COM ऐतरेय उपनिषद में कहा गया है कि सतत चलते रहो – चरैवति चरैवति! प्रवाह
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