भारतीय लोक एवं पारंपरिक कला के माध्यम से आध्यात्मिक विविधता का उत्सव मनाने वाली एक विशिष्ट प्रदर्शनी कला प्रेमियों के लिए Dubai International Art Centre में आयोजित की गई। ‘देवा’ शीर्षक से आयोजित इस प्रदर्शनी में लगभग सत्तर कलाकृतियों को एक साथ प्रस्तुत किया गया, जो विभिन्न धर्मों से प्रेरित हैं और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से एकता का संदेश देती हैं। इस प्रदर्शनी का आयोजन Indian Folk Art Corridor द्वारा किया गया।
हिंदू, इस्लाम, बौद्ध और जैन धर्म से प्रेरणा लेकर यह प्रदर्शनी दर्शकों को भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और कलात्मक विरासत की सजीव झलक प्रदान करती है। विदिशा पांडे द्वारा क्यूरेट की गई इस प्रदर्शनी में पिचवाई, थेय्यम, केरल म्यूरल, मधुबनी, कलमकारी, लिप्पन, तंजौर और शिल्प शास्त्र जैसी विविध पारंपरिक कला शैलियों को शामिल किया गया।
प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध, भगवान गणेश, भगवान कृष्ण, देवी दुर्गा और श्रीनाथ जी के मनोहारी चित्रों के साथ-साथ पवित्र काबा की कलात्मक प्रस्तुति भी प्रदर्शित की गई। इसके अतिरिक्त श्री यंत्र, बनारस घाट के दृश्य और गोपा अष्टमी जैसे उत्सवों के चित्रण ने अंतरधार्मिक सौहार्द की एक सशक्त और रंगीन कथा को प्रस्तुत किया।

प्रमुख आकर्षणों में थेय्यम कला और पिचवाई चित्रों ने विशेष रूप से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कई पिचवाई कृतियाँ भाग लेने वाले कलाकारों द्वारा विशेष रूप से भारत से भेजी गईं, जिससे प्रदर्शनी की प्रामाणिकता और गहराई और भी बढ़ गई।
सिर्फ एक प्रदर्शनी से आगे बढ़कर ‘DEVA’ विविध क्षेत्रों के भारतीय कलाकारों के लिए एक सशक्त अंतरराष्ट्रीय मंच बनकर उभरी है, जिसने उन्हें वैश्विक पहचान और दृश्यता प्रदान की। दुबई के बहुसांस्कृतिक समाज के कला प्रेमी, संग्राहक और सांस्कृतिक रसिक बड़ी संख्या में प्रदर्शनी में उपस्थित रहे और कलाकृतियों में निहित कहानी, शिल्प कौशल और सांस्कृतिक समृद्धि से गहराई से जुड़ाव महसूस किया।
DEVA के पीछे की सोच
अपनी परिकल्पना साझा करते हुए क्यूरेटर विदिशा पांडे ने बताया कि ‘DEVA’ भारतीय लोक और जनजातीय कला को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से परे ले जाने के उनके दीर्घकालिक मिशन का हिस्सा है। Indian Folk Art Corridor के माध्यम से वे पारंपरिक कलाकारों को सार्थक अवसर प्रदान कर उन्हें वैश्विक मंचों पर दृश्यता, सम्मान और गरिमा दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

कला के माध्यम से एकता का उत्सव
‘DEVA’ इस बात का प्रभावशाली उदाहरण है कि कला भौगोलिक सीमाओं, संस्कृतियों और आस्थाओं से परे होती है। विविध कलात्मक परंपराओं और आध्यात्मिक अभिव्यक्तियों को एक मंच पर लाकर इस प्रदर्शनी ने एकता, सौहार्द और साझा मानवता का सुंदर संदेश प्रस्तुत किया।
सहभागी कलाकार
इस प्रदर्शनी में अतुल, अंजिनी प्रकाश लैतु, शोमा, संध्या, पूनम, स्वपंथि, जीवन, सेजल, नीमा, राम्या, रेखा, सीमा, अंकिता, पुष्कला, अनुराधा, रानी, मोनी, राधा, सस्या, दीप्ति, परी, शिखा और विदिशा सहित अनेक प्रतिभाशाली कलाकारों की कृतियाँ प्रदर्शित की गईं।


