August 23, 2026
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मिथिला की कला ने रचा विश्व कीर्तिमान

 

मिथिला की समृद्ध कला परंपरा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ दिया। मधुबनी स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान में कैनवास पर तैयार की गई 108 मीटर लंबी विश्व कीर्तिमान पेंटिंग को 15 अगस्त को वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन ने आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान की।

स्वतंत्रता दिवस के विशेष अवसर पर वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन की टीम ने पूरी कलाकृति का सघन निरीक्षण किया और सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अपनी आधिकारिक मुहर लगाई। एक भव्य समारोह में संस्था के प्रतिनिधि मिस्टर क्रिस्टोफर ने मिथिला चित्रकला संस्थान को प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रदान किया।

रामचरितमानस के 51 प्रसंगों की अनूठी प्रस्तुति

यह ऐतिहासिक पेंटिंग मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन और रामचरितमानस के 51 प्रमुख प्रसंगों पर आधारित है। इसकी सबसे खास विशेषता यह है कि प्रत्येक दृश्य के नीचे उससे संबंधित दोहे भी बेहद कलात्मक ढंग से अंकित किए गए हैं।

इस विशाल कलाकृति को मिथिला चित्रकला संस्थान के डिग्री और सर्टिफिकेट कोर्स के लगभग 160 छात्र-छात्राओं ने महज चार दिनों की दिन-रात की अथक मेहनत से तैयार किया। विद्यार्थियों की सामूहिक प्रतिभा, समर्पण और मिथिला की पारंपरिक चित्रकला शैली का यह अद्भुत संगम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है।

संस्थान की गैलरी में स्थायी प्रदर्शन

विश्व पटल पर मिथिला की कला और संस्कृति की अमिट छाप छोड़ने वाली इस ऐतिहासिक पेंटिंग को मिथिला चित्रकला संस्थान की मुख्य गैलरी में स्थायी रूप से प्रदर्शित किया गया है, जहां कला प्रेमी इस अनूठी कृति का अवलोकन कर सकते हैं।

मल्टीपर्पस हॉल में आयोजित सम्मान समारोह में वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन के अधिकारी ने जिलाधिकारी आनंद शर्मा और संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह को मेडल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इस गौरवपूर्ण क्षण के साक्षी संस्थान के उत्साहित कलाकार, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में कला प्रेमी बने।

पद्मश्री हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति

समारोह में उपनिदेशक नीतीश कुमार, पद्मश्री से सम्मानित बउआ देवी, दुलारी देवी, शिवन पासवान और शांति देवी सहित अनेक वरिष्ठ हस्तियां मौजूद रहीं। इनके अलावा कनीय आचार्य डॉ. रानी झा, प्रतीक प्रभाकर, डॉ. संजय जायसवाल और लेखा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार यादव ने भी समारोह की गरिमा बढ़ाई।

वरिष्ठ साहित्यकार आनंद मोहन झा के कुशल मंच संचालन के बीच पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। 108 मीटर लंबी यह कलाकृति न केवल मिथिला के कलाकारों की सृजनात्मक क्षमता का प्रमाण है, बल्कि भारतीय संस्कृति, रामकथा और लोककला की वैश्विक पहचान को भी नई ऊंचाई प्रदान करती है।

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