Archive - pravasisamwad

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Chicken egg salad

November 16, 2021
Try this healthy recipe. Easy, as I always go for.  INGREDIENTS: Boiled breast pieces of Chicken ( shredded ) 3 Boiled eggs sliced

दास्तान-ए-इश्क़ भाग #6

November 16, 2021
इश्क़ के अंकुर निकले और वे भी वहाँ जहाँ इसकी संभावना सबसे कम थी। यह मेरे जीवन का सबसे सेक्युलर काल था PRAVASISAMWAD.COM मेरा पहला पदस्थापन गया हुआ था, जो गया हुआ पदस्थापन ही था। गया के विषय में प्रचलित है कि वहाँ की नदी में पानी नहीं, पहाड़ों पर पेड़ नहीं और आदमी में माथा नहीं। पहले दो तो स्पष्ट ही दिख जाते हैं, तीसरे के लिए कुछ वक़्त गया में बिताना पड़ता है। ABC बैंक की AC बिगड़ी हुई थी, संस्कृति सुधार की सीमाओं को लाँघकर बिगड़ी हुई थीं और ऐसे में यह ख्याल कि फ़ैज़ ने यह शेर ABC बैंक वालों को ही ध्यान में रखकर लिखा होगा सहसा मन मे आ ही जाता है। दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया तुझ से भी दिल–फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के कहने को दो शिफ़्ट लगती थी पर हम सुबह 8 से शाम 8 तक कैश काउंटर चलाते थे। फुर्सत साँस लेने की भी नहीं थी, लेकिन जीवन का प्रस्फुरण आदर्श परिस्थितियों का मोहताज नहीं होता। इश्क़ के अंकुर निकले और वे भी वहाँ जहाँ इसकी संभावना सबसे कम थी। यह मेरे जीवन का सबसे सेक्युलर काल था और इस काल में मैं हिन्दू-मुसलमान में परस्पर वैवाहिक संबंधों का जबरदस्त पक्षधर रहा। कुछ दिनों बाद मैंने अपना ध्यान धार्मिक एकता से हटाकर जातीय एकता पर लगाया। इश्क़ ने स्वयंसेवकों की शाखा से मुझे ऐसा तोड़ा कि मैं न मनुवादी ही रहा, न संघी। ख़ैर, यहाँ मयकशी में मैंने नित नए परचम लहराए। सुबह 6 बजे तक पीते रहने के बाद पौने 8 बजे शाखा में उपस्थित होने से लेकर, शाम 8 बजे से रात 11 बजे तक शाखा में पीने तक, सब कुछ किया गया। इस काल में मुझे ज्ञात हुआ कि भारतीय स्त्रियों को शराब से कुछ विशेष बैर है। यह ज्ञान आते-आते जीवन में 28 पतझड़ बीत चुके थे। इस तरफ़ बहार शायद आई ही नहीं या आई भी तो बिना मुझसे मिले चली गई। अकबर इलाहाबादी का यह शेर पढ़ते हुए वक़्त कट रहा था वो गुल हूँ ख़िज़ाँ ने जिसे बर्बाद किया है उलझूँ किसी दामन से मैं वो ख़ार नहीं हूँ और तब तक शाखा प्रबंधक के पद पर प्रोन्नति के साथ पदस्थापना का पत्र मिला। अब लगने लगा कि बस-अंत ही नहीं होता, बसन्त भी होता है। क्रमशः… ************************************************************************ Readers These are extraordinary times. All

योग के आयाम: आधुनिक परिप्रेक्ष्य में योग का स्वरूप

November 16, 2021
योग सम्पूर्ण व्यक्तित्व के रुपांतरण की प्रक्रिया है जो कहने , सुनने अथवा देखने की नहीं अपितु अनुभूति की अभिव्यक्ति है । यह मात्र आसन , प्राणायाम नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है । इसकी अभिव्यक्ति हमारे व्यवहार में तब होने लगती है जब यह हमारी दिनचर्या में हर पल रच बस जाती है । इस अभिव्यक्ति का मुख्य आधार  “यम” एवं “नियम” है जो यौगिक जीवन की पहली सीढ़ी है, जिस पर पहला कदम संकल्प के सहारे बढ़ाया जा सकता है । संकल्प का बीजारोपण श्रद्धा और विश्वास से होता है , अपने कर्म के प्रति , अपने ईष्ट के प्रति तथा अपने गुरु के प्रति । जिस प्रकार एक किसान जमीन के टुकड़े की जुताई करता है , उसमें से कंकड़ , पत्थर और मोथों को निकाल कर नरम बनाता है , फिर खाद , पानी डालकर बीज बोने के लिए खेत तैयार करता है उसी प्रकार ” यम और नियम ” भी हमारे व्यवहार में आने वाले नकारात्मक प्रवृतियों को समायोजित करने के साधन हैं। योग के ज्योत की अलख श्री स्वामी शिवानंद जी ने जलाई ‌जिसको उनके परम प्रिय शिष्य श्री स्वामी सत्यानंद जी ने विज्ञान की कसौटी पर कस कर घर – घर ही नहीं अपितु देश विदेशों में भी पहुंचाया । इसी परंपरा को आगे कायम रखते हुए उनके एकमात्र परम प्रिय शिष्य श्री स्वामी निरंजनानंद सरस्वती जी ने जो ” बिहार योग विद्यालय ” के परम आचार्य एवं संचालक हैं , आधुनिक परिवेश को देखते हुए जीवन शैली के रूप में सर्व सुलभ कराने का प्रयास जारी रखा है । मानवजाति की मानसिकता में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए यम एवं नियम को साधने की आवश्यकता है , जिसे मन को संयमित करके ही संभव है । मन का स्वभाव बच्चे की भांति चंचल है जिसको बल पूर्वक संयमित नहीं किया जा सकता , इसे मैत्री भाव से अनुशासित किया जा सकता है ।मन को अनुशासित करके ही इन्द्रियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा सकता है । आधुनिक सामाजिक परिवेश को देखते हुए स्वामी जी ने यम और नियम के नूतन आयामों को प्रतिपादित किया है , जैसे यम — अर्थात — प्रसन्नता , क्षमा , इन्द्रिय निग्रह ……आदि नियम — अर्थात — जप , नमस्कार ( विनम्रता ) , मनोनिग्रह ….. आदि ये सभी हमारी दिनचर्या के पहलू हैं जो ठीक वैसे ही एक दूसरे से अनुगुंठित हैं जैसे माला में मोती और धागा । समय के भागते हुए रफ्तार को देखते हुए स्वामी निरंजनानंद सरस्वती जी ने  यम एवं नियम के व्यवहारिक पक्षों की खोज की है और उसके छोटे से छोटे किन्तु महत्वपूर्ण पहलुओं को चलते फिरते अपनाने का मार्ग बतलाया है । —   सं. योगप्रिया (मीना लाल ) ************************************************************************ Readers These are extraordinary times. All of us have to rely on
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