योग के आयाम: योग में आत्मिक-विश्लेषण यौगिक जीवन में आत्मिक-विश्लेषण को प्राथमिकता दी गई है क्योंकि जब तक हम अपनी प्रकृति को नहीं समझेंगे तब तक
योग के आयाम: योग एवं योगविद्या योग एवं योगविद्या योग की परंपरा सनातन युग से चली आ रही है । हमारे धर्म गुरुओं ने , ऋषि
योग के आयाम: निग्रह / भक्ति इंद्रियनिग्रह योग ने सदैव मानव जीवन के कल्याण हेतु मनोनिग्रह एवं इंद्रियनिग्रह की बात की है| निग्रह— अर्थात् — निः—-नियंत्रण
योग के आयाम: शारीरिक एवं अध्यात्मिक पक्ष / प्रेम की अपार शक्ति योग का शारीरिक एवं अध्यात्मिक पक्ष ” प्रसनन्ता उर आनहु सबहीं कहै समझाए षट् रिपु द्वार खड़े हैं प्रभुजी दीजो
योग के आयाम: मन एवं इन्द्रियाँ / पहले प्रशिक्षण, फिर परिणाम मन एवं इन्द्रियाँ मन एवं इन्द्रियाँ एक दूसरे की पूरक हैं| मन सबका केंद्र बिंदु है| इन्द्रियाँ वे खिड़कियाँ हैं
योग के आयाम: प्रसन्नता / यम एवं नियम PRAVASISAMWAD.COM प्रसन्नता प्रसन्नता विपरीत परिस्थितियों में उनके नकारात्मक प्रभाव को कम करने में कवच का काम करता है| यह संतोषपूर्ण
योग के आयाम: विचार – सुविचार PRAVASISAMWAD.COM अनुकूल एवं प्रतिकूल परिस्थितियों का महत्व अनुकूल एवं प्रतिकूल परिस्थितियों का महत्वजीवन की यात्रा में अनुकूल एवं प्रतिकूल दोनों परिस्थितियाँ आती हैं जिसमें पूरी प्रकृति
योग के आयाम: समर्पण का आधार PRAVASISAMWAD.COM एक लघु कथा श्रद्धा एवं विश्वास – सिद्धांत एवं व्यवहारिकता में महान अंतर एक गाँव में एक माँ अपने