March 16, 2026
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हुनर की उड़ान: बोकारो के दो दिव्यांग भाइयों ने स्केच आर्ट से लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी

 

सुबह का समय था। बोकारो सेक्टर-6 के एक छोटे से कमरे में मेज पर कागज़, पेंसिल और एक टैबलेट रखे थे। सामने मोबाइल की स्क्रीन पर एक ग्राहक की तस्वीर खुली थी। कुछ ही मिनटों में पेंसिल चलने लगी—रेखाएँ आकार लेने लगीं, और धीरे-धीरे एक चेहरा कागज़ पर जीवंत हो उठा। यह किसी सामान्य कलाकार का स्टूडियो नहीं था, बल्कि दो ऐसे भाइयों की कार्यशाला थी जिन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को ही अपनी ताकत बना लिया।

बोकारो के अभय प्रकाश और उनके छोटे भाई आदित्य प्रकाश, जो मुख-बधिर हैं, ने दुनिया को यह दिखा दिया कि प्रतिभा को आवाज़ की नहीं, जुनून और मेहनत की ज़रूरत होती है। उन्होंने अपनी स्केच आर्ट और डिजिटल पेंटिंग के हुनर को सिर्फ शौक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। आज उनके बनाए पोर्ट्रेट्स की मांग बोकारो से निकलकर देश-विदेश तक पहुँच चुकी है—और उनकी कहानी यह साबित करती है कि जब इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा सपनों के रास्ते को रोक नहीं सकती। ✨

आज उनके बनाए हुए पोर्ट्रेट्स की मांग सिर्फ बोकारो तक सीमित नहीं रही। देश के कई शहरों के साथ-साथ विदेशों से भी लोग उनके बनाए स्केच और डिजिटल पेंटिंग मंगवा रहे हैं।

अभय प्रकाश पिछले तीन वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। बचपन से ही उन्हें चित्रकारी का गहरा शौक था। कागज और पेंसिल उनके सबसे अच्छे साथी थे।

लेकिन परिवार के सामने एक बड़ी चिंता थी आदित्य के मुख-बधिर होने के कारण भविष्य में रोजगार की संभावनाएँ सीमित लगती थीं।

इसी चिंता ने दोनों भाइयों को एक अलग रास्ता चुनने की प्रेरणा दी। उन्होंने तय किया कि अपनी कला को ही अपने भविष्य की पहचान बनाएंगे।

कला के इस सफर में दोनों भाइयों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने यूट्यूब के जरिए स्केचिंग और डिजिटल पेंटिंग की बारीकियां सीखीं।

धीरे-धीरे उनकी कला इतनी निखर गई कि आज वे किसी भी व्यक्ति की तस्वीर देखकर कुछ ही मिनटों में उसका सटीक और जीवंत पोर्ट्रेट तैयार कर लेते हैं।

अपने काम को पेशेवर पहचान देने के लिए उन्होंने SketchThePhotos.com नाम से एक वेबसाइट भी शुरू की, जहां से ग्राहक सीधे उनके बनाए पोर्ट्रेट्स ऑर्डर कर सकते हैं।

डिजिटल दुनिया ने उनकी कला को एक बड़ा मंच दिया। अब वे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon के जरिए भी अपने आर्टवर्क बेच रहे हैं।

उनके पोर्ट्रेट्स की शुरुआती कीमत ₹800 से शुरू होती है, जिसमें फ्रेमिंग भी शामिल रहती है। ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज्ड डिजिटल पेंटिंग और हैंड-स्केच पोर्ट्रेट बनवा सकते हैं।

दोनों भाइयों की मेहनत और कला का असर अब साफ दिखाई देता है।

हर महीने उन्हें 200 से 300 ऑर्डर मिलते हैं, जिन्हें वे मिलकर पूरा करते हैं। इस काम से उनकी मासिक आमदनी लगभग 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

उनके पिता, जो बोकारो स्टील प्लांट से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, अपने बेटों की इस उपलब्धि पर बेहद गर्व महसूस करते हैं। वे हमेशा उन्हें आगे बढ़ने और अपने सपनों को बड़ा करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं।

अभय और आदित्य की कहानी उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अक्सर रोजगार की कमी का हवाला देकर निराश हो जाते हैं।

इन दोनों भाइयों ने दिखा दिया कि अगर जुनून और मेहनत साथ हो, तो एक छोटा-सा शौक भी बड़े अवसरों के दरवाजे खोल सकता है।

अब उनका अगला लक्ष्य है अपने आर्ट बिजनेस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा ब्रांड बनाना।

और शायद यही उनकी सबसे बड़ी सफलता भी है—
यह साबित करना कि सीमाएँ शरीर में नहीं, सोच में होती हैं।
जब इरादे मजबूत हों, तो घर के एक छोटे से कोने से शुरू हुआ सपना भी दुनिया तक अपनी पहचान बना सकता है। 

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