जापान से मिला ऑफर ठुकराया, मऊ में रहकर बदली हजारों महिलाओं की ज़िंदगी: पेंटिंग चैंपियन मुमताज़ खान की मिसाल | Pravasi Samwad
August 11, 2025
8 mins read

जापान से मिला ऑफर ठुकराया, मऊ में रहकर बदली हजारों महिलाओं की ज़िंदगी: पेंटिंग चैंपियन मुमताज़ खान की मिसाल

“एक कलाकार समय से आगे की सोचता है” इस बात को मुमताज़ खान ने न सिर्फ साबित किया, बल्कि उसे जीकर दिखाया। विश्व पेंटिंग प्रतियोगिता में जापान को पीछे छोड़ भारत का नाम रोशन करने वाले मुमताज़ खान को विदेश में काम करने के कई प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने सब ठुकरा कर अपने गांव मऊ में ही रहकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की ठानी।

71 वर्षीय मुमताज़ खान का जन्म उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में हुआ। महज 12वीं तक पढ़ाई करने वाले मुमताज़ बचपन से ही पेंटिंग के शौकीन थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्होंने छोटी उम्र में ही दुकान खोली और पेंटिंग्स बनाकर बेचने लगे। साथ ही, संगीत का भी शौक था — रेडियो पर गीत सुनते और अंतरराष्ट्रीय समाचारों से जुड़ते रहते।

एक दिन जापान के रेडियो चैनल NHK पर उन्होंने विश्व पेंटिंग प्रतियोगिता की खबर सुनी। बिना देर किए, उन्होंने दिल्ली स्थित जापानी एंबेसी को अपनी पेंटिंग भेजी — और चुने गए! साल 1985 में हिरोशिमा-नागासाकी पर परमाणु हमले की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित प्रतियोगिता में 44,000 कलाकारों के बीच मुमताज़ खान ने भारत को विजेता का ताज दिलाया।

मंच पर जब विजेता के रूप में “आर्टिस्ट मुमताज़ खान” का नाम लिया गया, तो खुद मुमताज़ को भी यकीन नहीं हुआ। जापान में उन्हें वहीं रुकने और काम करने के कई ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने विनम्रता से कहा,

“मैं अपने देश और लोगों के लिए ही काम करना चाहता हूं, किसी और के लिए नहीं।”

उनकी इस सोच से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और अभिनेता व सांसद अमिताभ बच्चन ने भी उन्हें बधाई दी। बाद में जापान की एक टीम मऊ आई और उन पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई, जिसे कई देशों में दिखाया गया।

विदेश में नाम कमाने के बाद मुमताज़ खान ने मऊ में महिलाओं के कौशल विकास और रोज़गार के लिए 1985 में ललित कला प्रशिक्षण विकास परिषद की स्थापना की। शुरुआत में उन्हें सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ा — लोग बेटियों को बाहर भेजने से कतराते थे। मुमताज़ ने खुद घरघर जाकर पेंटिंग सिखाना शुरू किया।

धीरे-धीरे महिलाएं जुड़ती गईं और आज इस संस्था में सिलाई, कढ़ाई, मेहंदी, ब्यूटीशियन, म्यूजिक, कराटे, पब्लिक स्पीकिंग जैसे कई कोर्स सिखाए जाते हैं। अब तक यहां 25,000 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

कई महिलाएं लंदन तक में कला प्रदर्शन कर चुकी हैं, कुछ ने अपना पार्लर, बुटिक शुरू किया है, और कई अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने परिवार को सहारा दे रही हैं।

पिछले 35 वर्षों से संस्था बिना किसी सरकारी सहायता के चल रही है। मुमताज़ खान और उनकी टीम ही इसे निजी योगदान से संचालित कर रही है। संस्था समय-समय पर स्वच्छता अभियान, महिला सुरक्षा जागरूकता, प्रदर्शनी जैसे कार्यक्रम भी आयोजित करती है।

“हमने त्योहारों पर शांति बनाए रखने के लिए भी गली-गली जाकर काम किया, लेकिन सरकार से कभी कोई मदद नहीं मिली,” मुमताज़ कहते हैं।

आज “ललित कला” सालाना 500 से अधिक महिलाओं को ट्रेनिंग देती है। मुमताज़ खान ने साबित कर दिखाया कि सच्चा कलाकार सिर्फ रंगों से नहीं, समाज से भी जुड़ता है। उन्होंने न केवल चित्र बनाए, बल्कि हज़ारों ज़िंदगियों को नए रंगों से भर दिया।

यदि आप इस संस्था से जुड़ना चाहते हैं या इनकी सेवाएं लेना चाहते हैं, तो संपर्क करें: 9415884725

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