अत्याधुनिक तकनीक और आधुनिक बुनियादी ढांचे के बीच, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनआईए) एक ऐसी कहानी भी कहने की कोशिश कर रहा है जो उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी है।
15 जून से प्रस्तावित वाणिज्यिक उड़ानों के संचालन से पहले एयरपोर्ट पर अंतिम तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। बायोमेट्रिक-आधारित यात्रा प्रणाली, उन्नत बैगेज हैंडलिंग और आधुनिक यात्री प्रबंधन सुविधाओं से लैस यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट तकनीक के साथ-साथ संस्कृति को भी अपने डिजाइन का अभिन्न हिस्सा बना रहा है।
इसी दृष्टि के तहत पद्मश्री सम्मानित कलाकार परेश मैती की भव्य कलाकृतियों को एयरपोर्ट परिसर में स्थापित किया गया है। मैती द्वारा लगभग एक वर्ष में तैयार की गई छह परस्पर जुड़ी पेंटिंग्स उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को एक निरंतर दृश्य कथा के रूप में प्रस्तुत करती हैं।

इन चित्रों की श्रृंखला वाराणसी के घाटों और मंदिरों से शुरू होती है। इसके बाद सारनाथ स्थित स्तूप, मुक्ति और ज्ञान के प्रतीक के रूप में दिखाई देता है। तीसरे पैनल में ताजमहल है, जो भारत की सांस्कृतिक पहचान का विश्वविख्यात प्रतीक है। इसके बाद गोवर्धन पर्वत स्थित कुसुम सरोवर और भगवान कृष्ण से जुड़ी विरासत को दर्शाया गया है। अंतिम दो पैनलों में अयोध्या और महाकुंभ की आध्यात्मिक ऊर्जा और भव्यता को चित्रित किया गया है।
वर्तमान में ये कलाकृतियां चेक-इन क्षेत्र के निकट स्थापित हैं, लेकिन एयरपोर्ट के पूर्ण रूप से चालू होने के बाद इन्हें प्रस्थान क्षेत्र में अधिक प्रमुख स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा।

अपनी रचनात्मक प्रक्रिया के बारे में बताते हुए मैती कहते हैं, “मैंने कला को सरल और सहज रखने का प्रयास किया, क्योंकि कला सभी के लिए होती है और उसे आसानी से समझा जा सकना चाहिए।”
पारंपरिक विषयों के बीच उन्होंने समकालीन तत्वों को भी स्थान दिया है। वाराणसी की पेंटिंग में देव दीपावली के दौरान आकर्षण का केंद्र बनने वाले हॉट-एयर बैलून दिखाई देते हैं, जबकि अयोध्या के चित्र में शहर की मौलिकता को बरकरार रखा गया है।
मैती के अनुसार, सभी छह चित्रों को एक सूत्र में पिरोने वाला विषय है ‘जागृति’, जो नए आरंभ और उम्मीद का प्रतीक है। इसी कारण प्रत्येक पैनल में सूर्योदय और भोर के रंगों का प्रयोग किया गया है।
एयरपोर्ट में मैती की एक और विशेष कृति ‘मिस्टिक एबोड’ भी स्थापित की गई है। 8,000 से अधिक पीतल की घंटियों से निर्मित यह घर के आकार की कलात्मक संरचना पहली बार 2016 में स्विट्ज़रलैंड में प्रदर्शित की गई थी। यह अशांत दुनिया में शांति और आत्मिक संतुलन का संदेश देती है।
मैती कहते हैं, “घंटियों की ध्वनि में उपचार और शांति प्रदान करने की शक्ति होती है। लोग इस संरचना के भीतर चलकर एक अलग तरह की शांति और सुकून का अनुभव कर सकते हैं।”
केवल कलाकृतियां ही नहीं, बल्कि एयरपोर्ट की वास्तुकला में भी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सूक्ष्म रूप से समाहित किया गया है। पार्किंग क्षेत्र से टर्मिनल तक जाने वाली सीढ़ियां बनारस के घाटों की याद दिलाती हैं, जबकि खुला प्रांगण पारंपरिक उत्तर भारतीय हवेलियों से प्रेरित है।
टर्मिनल की छत को प्रदेश की नदियों के प्रवाह से प्रेरित लहरदार आकृतियों में डिजाइन किया गया है। इसके अलावा, आंतरिक सज्जा में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के हस्तशिल्प, वस्त्र और स्थानीय रूप से प्राप्त लाल ग्रेनाइट का उपयोग किया गया है।
एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, आगमन क्षेत्र में संझी कला की झलक देखने को मिलेगी। राज्य के विभिन्न उद्योगों से प्रेरित वास्तुशिल्पीय तत्व, डिजिटल कलाकृतियां और कई अन्य सांस्कृतिक प्रयोग भी यात्रियों के अनुभव को समृद्ध बनाएंगे।
इस तरह नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल एक परिवहन केंद्र नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और कलात्मक विरासत का आधुनिक परिचय बनकर उभर रहा है।



