समुद्र किनारे बसी कला की बस्ती: चोलामंडल कलाकार ग्राम कल्पना कीजिए—चेन्नई के शोर-शराबे से दूर, समुद्र की हवा में घुली रचनात्मकता, जहाँ कैनवास, हथकरघा और मूर्तियाँ साथ-साथ साँस लेती
दहलीज़ पर सजी कला: दक्षिण भारत की कोलम परंपरा दक्षिण भारत के राज्यों की यात्रा करें तो आपको केवल प्राकृतिक दृश्य और मंदिर ही नहीं, बल्कि हर घर की
कर्मा नृत्य से टैटू कला तक: बैगा समुदाय की अनकही कहानी भारत की विविधता केवल उसकी भाषाओं और भौगोलिक परिदृश्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में पनपती
पाँच रुपये की दिहाड़ी से वैश्विक कला मंच तक: तेजु बहन की असाधारण यात्रा जब सत्रह वर्षीय तेजु बहन अपने पति गणेश जोगी के साथ राजस्थान से अहमदाबाद आईं, तब उन्होंने कभी कल्पना भी
कपड़े पर उकेरी संस्कृति: पट्टचित्र की जीवित विरासत पट्टचित्र सिर्फ एक अमूर्त कला नहीं है, बल्कि यह कहानी कहने के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करती है।
जब चित्र बनते हैं शब्द: मनीषा झा की मधुबनी यात्रा “एक मधुबनी चित्रकार के लिए चित्र बनाना, लिखने जैसा होता है,” ऐसा मानती हैं भारत की प्रमुख मधुबनी कलाकारों में
शांति की तलाश में विवीक शर्मा: एक ऐसे कलाकार की कहानी जो स्थिरता को चित्रित करता है इस तेज़ रफ़्तार दुनिया में, जहाँ आवाज़ें विचारों से भी तेज़ चलती हैं, कलाकार विवीक शर्मा वह तलाश कर रहे
रमेश गोरजला: कैनवास पर पौराणिक कथाओं, स्मृतियों और आधुनिकता की बुनाई 2007 में जब मेरी मुलाकात समकालीन भारतीय कलाकार रमेश गोरजला से हुई, तब कला जगत में उनके नाम की खूब
लय की क्रांति: पद्मश्री गोकुल चंद्र दास और उनकी महिला ढाकी दल प्रसिद्ध ढाकी गोकुल चंद्र दास, जो इस वर्ष के पद्मश्री पुरस्कार के विजेताओं में से एक हैं, इस सम्मान को
कलाकार गुर्जर सिंह बघेल ने राष्ट्रीय राजधानी में अपनी जनजातीय कला से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को किया मंत्रमुग्ध प्रसिद्ध जनजातीय कलाकार गुर्जर सिंह बघेल ने नई दिल्ली में चल रही प्रदर्शनी में बाघों और वन जीवन पर आधारित