मगही कविता: मनवा मोरा मोर चल जयतय जे जेठ, बदरा अयतय घनघोर I रौद्र रौदा जैतय तखने मनवा नाचतय मोर I ठनकल जाहिया भुइयां, ठनकत
भाषा का विलास * ब्याज-स्तुति का उत्कृष्ट उदाहरण है बेनी कवि द्वारा रचित कविता राधा सौंदर्य। इसमें कवि गिनवाते हैं कि राधा रानी
आप का पंजाब मान सरकार की शासन शैली स्पष्ट रूप से पंजाब में दिल्ली मॉडल का अनुसरण करना चाहती है, और अपने इस
हौले हौले …….. आज की पीढ़ी, हमारी पीढ़ी से कहीं आगे है लेकिन एक जल्दबाज़ी है, जीवन के हर एक पहलू के मुताल्लिक़,
रहस्यमयी बाबा वांगा और उनकी २०२३ की भविष्यवाणी बाबा वांगा जिन्हे लोग बल्गेरियाई नोस्त्रेदमस भी कहते है, ने कथित रूप से साल २०२३ के लिए कुछ बहुत ही
हिजाब का ज़िहाद ईरान और भारत परिपेक्ष्य चाहे कुछ भी हो लेकिन जब किसी भी देश का सक्षम प्रशासन, देश की जनता के पहनावे में दखल
प्रॉम नाईट: पेरेंटिंग ब्लूज जब से इस प्रॉम नाईट के सवाल का गोला दागा गया है, क़सम से जितनी भी अंग्रेजी गालियां आती हैं
मकर संक्रांति विशेष: गुड़वत माधुर्य पूरे भारत में १५-१६ जनवरी को संक्रांति पर्व मानाने की परंपरा है। प्रवासी संवाद की साहित्य संपादक तोषी ज्योत्स्ना ने इस
रेलयात्रा का सु(दु:)खद संयोग दुनिया में दुःख है और गौतम बुद्ध कह गए हैं कि इसका कारण भी है सो मैं मान लेता हूँ
हालावाद के प्रणेता डॉ० हरिवंश राय ‘बच्चन’ शांत सकी हो अब तक, साकी, पीकर किस उर की ज्वाला, ‘और, और’ की रटन लगाता जाता हर पीनेवाला,