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विविध - Page 12

दास्तान-ए-इश्क भाग # 3

जब मैं काशी पहुँचा तब मुझे ज्ञात हुआ कि क्यों एक ब्रह्मचर्य व्रत धारी धनुर्धर काशी नरेश की कन्याओं को हर ले गया था PRAVASISAMWAD.COM सन 2000 में 12वीं की परीक्षा देने के साथ ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दाखिले की परीक्षा दी।

दास्तान-ए-इश्क़ भाग #2

हम तौबा कर के मर गए बे-मौत ऐ ‘ख़ुमार’ तौहीन-ए-मय-कशी का मज़ा हम से पूछिए   ख़ुमार  अब कुछ यही

दास्तान-ए-इश्क़ भाग # 1

मुझे पहली बार प्यार तब हुआ था, जब मैं बाल्यावस्था से किशोरावस्था की ओर बढ़ रहा था… PRAVASISAMWAD.COM इश्क पर मेरा कुछ कहना उतना ही हास्यास्पद  और  अप्रासंगिक है जितना कि मेरा बालों के रखरखाव के

धूमिल जयंती (९ नवंम्बर) विशेष: हिंदी कविता के एंग्री यंग मैन सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ को विनम्र श्रद्धांजलि

उन्हें शोषक पर क्षोभ तो था, पर शोषितों द्वारा शोषकों का ही पक्ष लेना भी पीड़ित करता था PRAVASISAMWAD.COM गुस्सा धूमिल की कविताओं का स्थायी भाव है। उन्हें व्यवस्था का छद्म बहुत साफ दिखता था, उन्हें कायरता

सच का लावा उगलती हैं, धूमिल की कविताएँ

धूमिल आज़ादी के पहले और बाद का ज़ख़्म खाया दिलो-जिगर रखते थे , जीवन मूल्यों और सामाजिक संरचना , अवसरवादिता और ज़िंदगी से जूझते मन – प्राण की एकदम नंगी तस्वीर प्रस्तुत करते रहे ,अपने इतने अल्प-काल के जीवन में। PRAVASISAMWAD.COM सुदामा पांडेय धूमिल को पढ़ती हूँ

माँ की सेवा सवाल है, तो आइये हम उत्तर बन जायें.- वीर

हालही में हरितवीर समिट-21 को वीरजी ने संबोधित किया, निम्नांकित रूप में इसी उद्भोदन को लेखित किया गया:  PRAVASISAMWAD.COM  मैं समझता हूँ, शक्ति ही सबकुछ है, और जहाँ शक्ति है वहां सुनवाई है, कार्यवाही है। ताकत, शक्ति, पॉवर, कुछ ऐसे शब्द हैं,  जो सबकुछ
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