May 22, 2025
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शारजाह से कान्स तक: रैसा मरियम राजन की कला की यात्रा

हर कलाकार का सपना होता है कि उसकी कला विश्व पटल पर पहचानी जाए और जब वह मौका दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित कला प्रदर्शनी से मिले, तो हैरानी स्वाभाविक है।

कुछ ऐसा ही हुआ रैसा मरियम राजन के साथ, जो संयुक्त अरबअमीरात में एक सुविधा प्रबंधन कंपनी की सीईओ हैं और साथ ही एक समर्पित कलाकार भी। जब उन्हें इंटरनेशनल कंटेम्पररी आर्ट कान्स बिएनाले (ICACB) से अपनी कलाकृति प्रस्तुत करने का आमंत्रण ईमेल के ज़रिए मिला, तो उनकी पहली प्रतिक्रिया थी — “यह मज़ाक तो नहीं?”

यह संदेह स्वाभाविक था। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित कला प्रदर्शनियों में से एक, ICACB हर साल केवल 60 कलाकारोंका चयन करती है, और वह भी कान्स फिल्म फेस्टिवल के समांतर आयोजित होने वाले मंच पर। रैसा उस समय अपनीगिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड जीत का जश्न मना रही थीं — उन्होंने टिकाऊ सामग्रियों से बनाई गई अपनी पेंटिंग के लिए यहउपलब्धि हासिल की थी। और तभी यह ईमेल आया। “यह सच होने के लिए बहुत अच्छा लग रहा था,” रैसा मुस्कुराते हुएयाद करती हैं।

आत्म–अन्वेषण की यात्रा

शारजाह में पली-बढ़ी रैसा कोई पारंपरिक कलाकार नहीं रहीं। न उन्होंने कला संस्थानों में शिक्षा ली, न ही किसी बड़े गैलरीनेटवर्क से जुड़ीं। वे एक स्व-प्रशिक्षित कलाकार, वास्तुकार और सफल उद्यमी हैं, जो दिन में अपनी कंपनी की सीईओ हैं औररात में कैनवस पर अपने विचारों को आकार देती हैं। उनका सफर आत्म-अन्वेषण, पर्यावरण के प्रति जागरूकता औरस्त्री-अस्मिता के इर्द-गिर्द बुना हुआ है।

उनकी पिछली प्रदर्शनी ‘मदर्स ऑरा’  जो बार्सिलोना के प्रसिद्ध यूनेस्को धरोहर स्थल ला पेद्रेरा में लगी थी — में एक माँ कीकोख में बच्चे की सुरक्षा को प्रकृति के पाँच तत्वों के साथ दर्शाया गया था। यही कलात्मक दृष्टिकोण संभवतः ICACB केक्यूरेटरों को इतना आकर्षक लगा कि उन्होंने रैसा को स्वयं आमंत्रित किया।

‘रिफ्लेक्शंस’: एक विचारशील प्रतिबिंब

आमंत्रण की पुष्टि होते ही रैसा ने ‘रिफ्लेक्शंस’ नामक अपनी नवीनतम कलाकृति पर काम शुरू कर दिया। यह कृति पूरीतरह उनके पड़ोस से इकट्ठा किए गए पुनः उपयोग योग्य (recycled) और टिकाऊ (sustainable) सामग्रियों से बनाई गई, एक तरह से यह UAE के ‘ईयर ऑफ सस्टेनेबिलिटी’ को समर्पित एक रचनात्मक सलामी थी।

“फ्यूशिया रंग का जो मटेरियल मैंने इस्तेमाल किया, वह शारजाह के एक दर्जी की दुकान के बाहर फेंका गया था। मैंने उसेउठाया और इस तरह सिलाई की कि वह मेरी कला में अर्थ भर दे,” — वह बताती हैं।

यह कृति दो महिलाओं को दर्शाती है, जो काले कैनवस पर आमने-सामने खड़ी हैं। उनके बाल भूरे रस्सियों से बने हैं, जोपितृसत्तात्मक बेड़ियों का प्रतीक हैं। चेहरे पर पुराने अख़बार की कतरनों और कांच के टुकड़ों की चिप्पियाँ हैं — जैसे हरमहिला के चेहरे पर समय और समाज के घाव अंकित हों।

कला के माध्यम से स्त्री संघर्ष की आवाज़

रैसा कहती हैं, “मैं चाहती थी कि मेरी कला यह दर्शाए कि सदियों से महिलाएं किन संघर्षों से गुज़रती रही हैं। चाहे वहएशिया की महिला हो, अफ्रीका की या किसी और हिस्से की — हर महिला इस भावना से जुड़ पाए।“

उन्होंने इस परियोजना में एक प्रसिद्ध जर्मन एथलेटिक परिधान कंपनी के साथ साझेदारी भी की, जिससे उनके कला केमाध्यम से स्थिरता (sustainability) का संदेश और भी प्रभावी रूप से सामने आया।

भविष्य की ओर

कान्स की चमकदार गलियों में जब रैसा की कृति प्रदर्शित हुई, तो यह सिर्फ एक कलाकृति नहीं थी — यह एक विचार था, एक बयान था और एक आवाज़ थी, जो दुनिया भर की उन महिलाओं के लिए थी जिनकी कहानियाँ अक्सर अनसुनी रहजाती हैं।

शारजाह की गलियों से निकली यह कलाकार अब वैश्विक कला परिदृश्य पर अपनी छाप छोड़ रही है। रैसा मरियम राजनकी कहानी यह साबित करती है कि जुनून, संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना से सजी कला सीमाओं को लांघ सकती है— और दुनिया को थोड़ा बेहतर बना सकती है।

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