योग के आयाम: मनोबुद्धिरहंकारा चित्तरूपा चिता चिति… हमारे अंतःकरण में समाहितमन, बुद्धि, चित्त और अहंकारहमारी कमजोरियाँ नहीं अपितु आध्यात्मिक पथ के साधन हैं| इनकी शक्तियों कासदुपयोग ही
योग के आयाम: मनोनिग्रह (दान्ती) एवं इन्द्रिय निग्रह हमारी इन्द्रियाँ अपने अनुभवों की सूचना निरंतर मन को पहुँचाती हैं| जहाँ मन इनकी छँटनी बुद्धि एवं विवेक के द्वारा
योग के आयाम: अनुकूलता एवं प्रतिकूलता के बीच संघर्ष प्रतिकूल परिस्थितियाँ सीखने की प्रक्रिया में उत्प्रेरक (catalyst ) की भूमिका निभाती हैं| जब अनुकूलता एवं प्रतिकूलता के बीच संघर्ष
योग के आयाम: नकारात्मक विचारों को सकारात्मक रूप देना प्रतिपक्ष-भावना — नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों का रूप देना | यह बुद्धि के सदुपयोग को दर्शाती है जो साधना के रूप
योग के आयाम: मन की प्रवृत्ति हमेंशा व्यवहार में झलकती है हमारे जीवन के दो पक्ष हैं– सांसारिक और आध्यात्मिक| शांतिपूर्ण एवं सुखमय जीवन के लिए इन दोनो में समन्वय आवश्यक
योग के आयाम: कोरोना काल के ‘अनुभव’ एवं ‘अनुभूति’ जीवन की घटनाओं का अनुभव एवं मन पर उनके प्रभावों की अनुभूति हैं तो प्रकृति प्रदत्त किन्तु अनुभव का स्वरूप
योग के आयाम: इन्द्रिय निग्रह एवं मनोनिग्रह योग के विभिन्न आयामों में इन्द्रिय निग्रह एवं मनोनिग्रह की बहुत अहम भूमिका हमारे यौगिक जीवन में रही है। हमारी
योग के आयाम: योग में आत्मिक-विश्लेषण यौगिक जीवन में आत्मिक-विश्लेषण को प्राथमिकता दी गई है क्योंकि जब तक हम अपनी प्रकृति को नहीं समझेंगे तब तक
योग के आयाम: योग एवं योगविद्या योग एवं योगविद्या योग की परंपरा सनातन युग से चली आ रही है । हमारे धर्म गुरुओं ने , ऋषि
योग के आयाम: निग्रह / भक्ति इंद्रियनिग्रह योग ने सदैव मानव जीवन के कल्याण हेतु मनोनिग्रह एवं इंद्रियनिग्रह की बात की है| निग्रह— अर्थात् — निः—-नियंत्रण