योग के आयाम: भूल की परिणति सुधार हम भूल के भँवर में ही फँस कर रह जाते हैं और परिणति तक पहुँच नहीं पाते भूल — सीखने
योग के आयाम: तामसिक एवं सात्विक गुण कर्म ही तप है श्रद्धा से करने की मिली है सीख प्रेम से झोली भर डाली बिन माँगे ही भीख
योग के आयाम: मन की प्रवृत्ति हमेंशा व्यवहार में झलकती है हमारे जीवन के दो पक्ष हैं– सांसारिक और आध्यात्मिक| शांतिपूर्ण एवं सुखमय जीवन के लिए इन दोनो में समन्वय आवश्यक
योग के आयाम: कोरोना काल के ‘अनुभव’ एवं ‘अनुभूति’ जीवन की घटनाओं का अनुभव एवं मन पर उनके प्रभावों की अनुभूति हैं तो प्रकृति प्रदत्त किन्तु अनुभव का स्वरूप
योग के आयाम: मनसा— वाचा— कर्मणा ” बीज की पीड़ा भला तुम क्या जानो देता जनम जो खुद को मिटा कर देना ही जीवन है देकर तो
योग के आयाम: आत्मसाक्षात्कार; प्रत्याहार+भक्ति = आंतरिक स्थिरता “चुन- चुन कर अनुभव के मोती बोलों में हूँ पिरोती गुरू चरणों में हार बनाकर करती उन्हें समर्पित ”
योग के आयाम: इन्द्रिय निग्रह एवं मनोनिग्रह योग के विभिन्न आयामों में इन्द्रिय निग्रह एवं मनोनिग्रह की बहुत अहम भूमिका हमारे यौगिक जीवन में रही है। हमारी
योग के आयाम: अध्यात्म , साधना , संस्कार जीवन को तमस से मोड़कर सत्व (प्रकाश) की ओर अभिमुख करना ही अध्यात्म है । विभिन्न सद्गुणों को अपनी चेतना
योग के आयाम: योग में आत्मिक-विश्लेषण यौगिक जीवन में आत्मिक-विश्लेषण को प्राथमिकता दी गई है क्योंकि जब तक हम अपनी प्रकृति को नहीं समझेंगे तब तक
योग के आयाम: योग एवं योगविद्या योग एवं योगविद्या योग की परंपरा सनातन युग से चली आ रही है । हमारे धर्म गुरुओं ने , ऋषि