August 24, 2026
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तन्हा

लग रहा था कि घर में तन्हा हूँ!

मैं तो लेकिन नगर में तन्हा हूँ!

साथ मेरे है क़ाफ़िला फिर भी!

है तअज्जुब सफ़र में तन्हा हूँ!

चाहने वाले हैं हज़ार मगर!

हर किसी की नज़र में तन्हा हूँ!

बुझ चुका इक चराग़ हूँ गोया!

कौन सा मैं असर में तन्हा हूँ!

मिल ही जाएगा हां मुक़ाम मुझे!

गर यक़ीनन हुनर में तन्हा हूँ!

Baljeet Singh Hansi

Baljeet Singh Hansi

हांसी, हरियाणा के युवा ग़ज़लकार, बलजीत सिंह 'बेनाम', अपनी रचनाओं में हरियाणवी पृष्ठभूमि और शहरी संवेदना के द्वंद्व को प्रभावशाली ढंग से पिरोते हैं। उनकी रचनाएँ ‘अभिनव इमरोज़’, ‘प्रवासी संवाद’ तथा ‘साक्षात्कार’ (मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी) में प्रकाशन हेतु स्वीकृत/प्रक्रियाधीन हैं।)

उर्दू और हिंदी की सहज अभिव्यक्ति का सुंदर संगम उनकी ग़ज़लों की विशिष्ट पहचान है।

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